Tuesday, December 17, 2024

व्याकरण भाग - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया

 

संज्ञा

         संज्ञा की परिभाषा

१) किसी  भी व्यक्ति, वस्तु, जाति, भाव या स्थान के नाम को संज्ञा कहते हैं।

         जैसे  रशिया(व्यक्तिवाचक), बैल(जातिवाचक),

           भड़ास(भाववाचक),   चांदी (द्रव्यवाचक), 

           कक्षा(समूहवाचक)

संज्ञा के भेद

         १) व्यक्तिवाचक संज्ञा -

         जैसे – नरेश, कावेरी, जमुना, पूर्व, सतपुड़ाहिंद महासगर, वाराणसी, सीरिया, दीपावली

        भगवद गीता, जनवरी, बुधवार, रावी, मई, अष्टाध्यायी, अरावली, सतलज, सह्याद्री

२) जातिवाचक संज्ञा – जैसेमनुष्य, घर, नदी, पहाड़, पुरुष, महिला, पश्चिम, नारी, गाय, अध्यापक, मोर,पुस्तक.

३) समूहवाचक संज्ञा – जैसेसभा, दल, गिरोह, मेला, समिति, गुच्छा, सेना

४) द्रव्यवाचक संज्ञा – जैसेघी, तेल, हल्दी, चाँदी

५) भाववाचक संज्ञा – जैसे – मित्रता, लंबाई, बुढ़ापा, नम्रता, मिठास,लड़कपन 

सर्वनाम

सर्वनाम की परिभाषा – “वाक्य में संज्ञा की पुनरुक्ति को दूर करने के लिए संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

जैसेमहेश विद्यालय जाता है। वह वहाँ पढ़ता है। उसके पास कलम है।

सर्वनाम के प्रकार

सर्वनामसर्वनाम छ: प्रकार के होते हैं।

      १) पुरुषवाचक सर्वनाम - 

                   अ) उत्तम पुरुष  - मैं, मेरा, मुझे, हम, हमारा हमें आदि।

                   आ) मध्यम पुरुष - तू, तुम, तुझे, तुम्हें, तेरा, आप, आपका, आपको।

                    इ) अन्य पुरुष    -  वह, वे, उन्हें, उसे, इसे, उसका, इसका आदि।

पुरुषवाचक सर्वनाम

 

एक बचन

 बहुवचन

उत्तमपुरुष

मैं

हम

मध्यमपुरुष

तू /तुम

तुम/तुम लोग

अन्यपुरुष

वह

वे

सर्वनाम के प्रकार

२) निश्चयवाचक सर्वनाम  - यह, वह, उस, इस, ये, वे आदि। 

           जैसे - यह आवाज महमद रफी जी की है।

३) अनिश्चयवाचक सर्वनामकोई, कुछ, किसी

          जैसे - कोई रहा है।

४) प्रश्नवाचक सर्वनाम - कौन, क्या, किसकी

          जैसेक्या गाना गा रही है?

५) संबंधवाचक सर्वनामजो-वह, जितना-उतना,

          जैसेजितना पढ़ोगे उतने  अंकों से पास होंगे

६) निजवाचकआप, स्वयं, खुद

         जैसेमैं अपना खाना  खुद  बनाता हूँ।

                           मैं अपना काम आप करता हूँ।

विशेषण

विशेषण की परिभाषा

1)  वे शब्द, जो किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें विशेषण  कहा  जाता है।

      2) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं।

   जैसे – गुलाबी गुलाब उसे बहुत पसंद है।

1) गुणवाचक विशेषणकाला, पुराना, भला, छोटा, मीठा, पतला, गोल

2) संख्या वाचक विशेषणएक, दो, तीन, पहला, दूसरा, दुगुना, चौगुना, दोनों, तीनों,

3) सार्वनामिक विशेषणदो मीटर, दो किलो, दो किलोमीटर, दो लीटर, थोड़ा, बहुत,  

   कम, ज्यादा

क्रिया

 क्रिया की परिभाषा

१.     वे शब्द जिसके द्वारा कार्य का करना या होना पाया जाता है उन्हें क्रियापद कहते  हैं।

जैसे. संजय विद्यालय जाता है। २)विजय आम खाता है। ३) संजना गाना गाती है।

  क्रिया का महत्व१) भाषा में वाक्य को पूर्ण अर्थ प्रदान करने के लिएक्रियाका होना आवश्यक होता है। क्रिया के कारण कार्य किसके द्वारा हो रहा है एवं कौन-सा कार्य किया जा रहा है, इसकी जानकारी प्राप्त होती है।

  जैसेअमर कबड्डी खेल रहा है।

     इस वाक्य मेंअमरके कबड्डीखेलनेकी जानकारी प्राप्त होती है। कई बार वाक्य के अन्य योजकों का प्रयोग न होने पर भी मात्र क्रिया से ही वाक्य पूर्ण होता है।

  जैसे१) ‘श्याम दौड़ता है।२) ‘श्याम दौड़ता था।३) ‘गीता दौड़ती है।

      क्रिया का मूल धातु होता है।

क्रिया के भेद

रचना के आधार पर क्रिया के भेद:    

(१) अकर्मक क्रिया

(२) सकर्मक क्रिया

  जैसे१) मोना रोती है। २) हवा चलती है। ३) मोहन आम खाता है। ४) माँ खिलाती है।


क्रिया के अन्य भेद

  प्रेरणार्थक क्रियाजैसेराम मोहन को हँसाता है।

  नामबोधक क्रियाभस्म करना(संज्ञा+क्रिया), दुखी होना(विशेषण+क्रिया)                    

  संयुक्त क्रिया    जैसेपढ़ लेना ।

  पूर्वकालिक क्रियाजैसेवह खाना खाकर विद्यालय गया।

  सहायक क्रिया      जैसेहै,  हैं,  था,  थी।

क्रिया पहचानिए

1)  मेरा सिर खुजलाता है ।   2)  मै अपना सिर खुजलाता हूँ।                  

3) मैं घड़ा भरता हूँ।         4) घड़ा भरता है।     5) साबुन घिसता है।